अल्मोड़ा में नेशनल हाईवे चौड़ीकरण से उत्पन्न संकट: ग्राम शैल से पांडेखोला के ग्रामीणों ने केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा को सौंपा ज्ञापन
अल्मोड़ा, उत्तराखंड – ग्राम शैल से पांडेखोला तक के ग्रामीणों ने हाल ही में एक संगठित विरोध प्रकट करते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री श्री अजय टम्टा से मुलाकात की और एक ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन के माध्यम से उन्होंने अपने घरों के चिह्नित किए जाने और उससे उत्पन्न हो रही असुरक्षा के माहौल पर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। इस मुलाकात में हजारों की संख्या में ग्रामीण शामिल हुए, जिन्होंने शांतिपूर्ण रूप से अपनी चिंता और पीड़ा को जनप्रतिनिधि के समक्ष रखा।
यह संकट तब सामने आया जब नेशनल हाईवे के चौड़ीकरण कार्य के अंतर्गत ग्राम शैल से होकर गुजरने वाली सड़क के किनारे बसे कई घरों को हाईवे विभाग द्वारा चिह्नित किया गया। बिना किसी पूर्व सूचना या पारदर्शी संवाद के इस कार्रवाई ने स्थानीय निवासियों को चिंता में डाल दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि चिह्नांकन के बाद उनके घरों को तोड़े जाने का खतरा मंडरा रहा है, जो कि उनके लिए किसी भी बड़ी त्रासदी से कम नहीं है।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि वर्षों की मेहनत और जीवन की पूंजी से ग्रामीणों ने अपने छोटे-छोटे घर बनाए हैं। यदि वे घर टूटते हैं तो न केवल उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित होगी, बल्कि उनका संपूर्ण जीवन अस्त-व्यस्त हो जाएगा। ग्रामीणों ने मांग की है कि जब तक कोई ठोस योजना, मुआवजा नीति और पुनर्वास की प्रक्रिया तय नहीं हो जाती, तब तक इस प्रकार की कार्रवाई पर रोक लगाई जाए।
ग्रामीणों ने सांसद श्री अजय टम्टा को उनके पुराने वक्तव्यों की भी याद दिलाई, जब उन्होंने केंद्रीय परिवहन राज्य मंत्री बनने के बाद पहाड़ी क्षेत्रों के लिए विशेष नियमावली बनाए जाने की बात की थी। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे वादों के बावजूद ज़मीनी स्तर पर न तो कोई राहत पहुंची है और न ही किसी नीति में आम जनता की भलाई के लिए कोई बदलाव दिखाई दे रहा है।
इस मौके पर स्थानीय महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं ने भी खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि विकास की राह पर चलना आवश्यक है, लेकिन विकास के नाम पर आम लोगों की छत छीन लेना किसी भी तरह से न्यायसंगत नहीं है।
ज्ञापन में प्रमुख रूप से निम्नलिखित मांगें उठाई गईं:
चिह्नित किए गए घरों पर तत्काल कार्रवाई को रोका जाए।
जनसंवाद स्थापित कर प्रभावित परिवारों को योजना की पूर्ण जानकारी दी जाए।
पुनर्वास एवं मुआवजे की पारदर्शी व्यवस्था लागू की जाए।
पर्वतीय क्षेत्रों के लिए विशेष नीति जल्द लागू की जाए, जिससे भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से निपटा जा सके।
अंत में, ग्रामीणों ने आशा जताई कि अजय टम्टा इस मुद्दे को संसद और संबंधित मंत्रालय तक पहुंचाएंगे तथा इसे प्राथमिकता से हल कराने का प्रयास करेंगे। ग्रामीणों का कहना है कि यह सिर्फ घरों की रक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि उनकी अस्मिता, भविष्य और भावनाओं की सुरक्षा का प्रश्न है।
इस ज्ञापन को सौंपने वालों में कई प्रमुख स्थानीय नेता और ग्रामीण शामिल थे, जिनमें कपिल मल्होत्रा (पूर्व ग्राम पंचायत सदस्य), पार्षद अमित साह, पार्षद ज्योति साह, पार्षद अर्जुन सिंह बिष्ट, मुन्नी तिवारी, कमल तिवारी, विनोद जोशी, अनिल शैली (पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य), देवेंद्र गोनी और नंदन सिंह मेहता, मो परवेज़ अतुल पांडे, समेत बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे। ग्राम शैल से पांडेय खोला तक के निवासियों की यह समस्या मानवता और सामाजिक न्याय से जुड़ी हुई है। सरकार को चाहिए कि वह स्थानीय जनता की भावनाओं का सम्मान करे और कोई ऐसा समाधान निकाले जिससे विकास कार्य भी बाधित न हो और लोगों के घर भी सुरक्षित रहें। ग्रामीणों ने प्रशासन से अपील की है कि इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए तुरंत उचित कार्रवाई की जाए, ताकि वे अपने भविष्य को लेकर आश्वस्त हो सकें।