विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (वीपीकेएएस) हवालबाग में कार्यरत दैनिक श्रमिकों ने अपनी मांगों को लेकर आज दिनांक 02 अप्रैल 2025 को पुनः हड़ताल जारी रखी। श्रमिकों का आरोप है कि प्रशासन ने उनकी समस्याओं का कोई समाधान नहीं किया और अब तक केवल झूठे आश्वासन देकर उन्हें गुमराह किया गया है।
संस्थान के निदेशक लक्ष्मीकांत द्वारा पहले श्रमिकों को लिखित आश्वासन दिया गया था कि संस्थान को 15 दिनों का समय दिया जाए, लेकिन इन 15 दिनों में प्रोजेक्ट बंद होने का बहाना बनाकर 20 श्रमिकों को नौकरी से निकाल दिया गया। श्रमिकों का आरोप है कि यह एक सोची-समझी साजिश के तहत किया गया और आने वाले समय में और अधिक श्रमिकों को हटाने की योजना बनाई जा रही है।
श्रमिकों के शोषण के खिलाफ संघर्ष
दैनिक श्रमिकों का कहना है कि निदेशक के इस रवैये से उनकी रोजी-रोटी पर संकट आ गया है। उनके अनुसार, यह निदेशक की संकीर्ण मानसिकता और बदले की भावना को दर्शाता है। श्रमिकों ने पहले भी अपने एक अधिकारी से माफी मंगवाई थी, जिससे निदेशक की प्रतिष्ठा पर आघात पहुंचा था। इसके बाद से ही निदेशक ने श्रमिकों के खिलाफ सख्त रवैया अपना लिया और उन्हें परेशान करने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाने लगे।
डीएम से मुलाकात और समर्थन
अपने अधिकारों के लिए लड़ते हुए श्रमिकों ने जिलाधिकारी (डीएम) अल्मोड़ा से मुलाकात की और अपनी समस्याओं से उन्हें अवगत कराया। डीएम ने श्रमिकों को आश्वासन दिया कि उनकी समस्याओं का उचित समाधान निकाला जाएगा।
इस हड़ताल में स्थानीय जनप्रतिनिधि विनोद पंत एडवोकेट भी श्रमिकों के समर्थन में डीएम कार्यालय पहुंचे और उन्होंने श्रमिकों की स्थिति को मजबूती से प्रशासन के सामने रखा। इसके अलावा, जनप्रतिनिधि विनय किरोला की उपस्थिति में श्रमिकों की हड़ताल को और मजबूती दी गई।
निदेशक पर लगे अन्याय के आरोप
श्रमिकों का आरोप है कि निदेशक अपनी कुर्सी के अहंकार में उनकी रोज़ी-रोटी पर चोट कर रहे हैं। वे श्रमिकों को लगातार डराने-धमकाने और नौकरी से निकालने की साजिश रच रहे हैं। श्रमिकों का कहना है कि वे अपने हक की लड़ाई लड़ेंगे और जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलेगा, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
वीपीकेएएस हवालबाग में श्रमिकों का संघर्ष प्रशासन की अनदेखी और अन्यायपूर्ण नीतियों के खिलाफ है। श्रमिकों का आंदोलन अब केवल उनकी नौकरी बचाने की लड़ाई नहीं, बल्कि उनके सम्मान और अधिकारों की रक्षा का भी विषय बन गया है। डीएम के आश्वासन के बाद श्रमिकों को उम्मीद है कि जल्द ही कोई ठोस समाधान निकलेगा, लेकिन यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।