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08 मार्च, 2025 को जनपद अल्मोड़ा के सभी न्यायालयों में आयोजित होगा राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा

कपिल मल्होत्रा
Last updated: February 12, 2025 9:36 pm
कपिल मल्होत्रा
12 months ago

सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अल्मोड़ा, सुश्री शचि शर्मा द्वारा न्यायालय अल्मोड़ा में आयोजित प्रेस वार्ता में यह जानकारी दी गई कि माननीय राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, नैनीताल के निर्देशानुसार और माननीय जनपद न्यायाधीश / अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अल्मोड़ा श्रीकांत पाण्डेय जी के मार्गदर्शन में आगामी 08 मार्च, 2025 को जनपद अल्मोड़ा के सभी न्यायालयों में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। इस लोक अदालत में वादों का निस्तारण सुलह और समझौते के आधार पर किया जाएगा, जिससे वादकारियों को लंबित मामलों का शीघ्र समाधान मिल सकेगा।

सचिव ने यह भी बताया कि पिछली राष्ट्रीय लोक अदालत, जो 14 दिसंबर, 2024 को आयोजित की गई थी, में उत्तराखण्ड राज्य के न्यायालयों में लंबित वादों का निस्तारण करने का प्रतिशत अत्यधिक 99.73% था। आगामी लोक अदालत में भी अधिक से अधिक मामलों का निस्तारण करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए बैंकों, इंश्योरेंस कंपनियों के अधिकारियों, विद्वान अधिवक्ताओं, बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों, पुलिस विभाग और परिवहन विभाग के साथ अब तक दो प्री-लोक अदालत बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं। इसके साथ ही, पैम्पलेट्स के माध्यम से राष्ट्रीय लोक अदालत के विषय में जागरूकता भी फैलायी जा रही है, और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अल्मोड़ा के पैराविधिक कार्यकर्ता विभिन्न शिविरों में आम जनता को इस संबंध में जानकारी दे रहे हैं।

सचिव ने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय लोक अदालत में केवल वही वाद नियत किए जाते हैं जिनका निस्तारण सुलह समझौतें के आधार पर किया जा सकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यदि किसी मामले में न्यायालय में कोर्ट फीस (न्याय शुल्क) जमा किया गया है और वह मामला राष्ट्रीय लोक अदालत में निस्तारित हो जाता है, तो पक्षकार को पूरा न्याय शुल्क वापस (रिफंड) किया जाता है। यह राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से सुलह और समझौते के आधार पर समाधान का एक महत्वपूर्ण लाभ है।

राष्ट्रीय लोक अदालत में निम्नलिखित प्रकार के मामलों का निस्तारण किया जा सकता है:

1. फौजदारी शमनीय मामले (जिनमें कानूनी रूप से राजीनामा संभव हो),


2. श्रमिक एवं नियोजन से संबंधित विवाद,


3. पैसे के लेन-देन के विवाद,


4. विवाह से संबंधित विवाद (तलाक के मामलों को छोड़कर),


5. अन्य दीवानी मामले जैसे किरायेदारी, व्यादेश, विनिर्दिष्ट अनुपालन आदि,


6. चैक बाउंस के मामले,


7. मोटर एक्सीडेंट के मुआवजे के मामले,


8. बिजली/पानी के बिलों के मामले (शमनीय),


9. भूमि अधिग्रहण के मामले (जो जिला न्यायालय में लंबित हों),


10. राजस्व मामलों से संबंधित विवाद (जो जिला न्यायालय में लंबित हों),


11. उपभोक्ता फोरम में लंबित वाद,


12. मोटर वाहन अधिनियम के तहत शमनीय प्रकृति के ट्रैफिक चलान।



इन सभी मामलों का निस्तारण लोक अदालत के माध्यम से किया जा सकता है। इसके अलावा, उन मामलों का भी निस्तारण किया जाएगा जो अभी तक अदालत में नहीं पहुंचे हैं, जैसे चैक बाउंस के विवाद, पैसे के लेन-देन के विवाद, श्रमिक और नियोजन विवाद, बिजली, पानी और फोन के बिलों के विवाद, भरण-पोषण का विवाद, अन्य फौजदारी (शमनीय) और दीवानी विवाद।

सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अल्मोड़ा ने वादकारियों और आम जनता से अपील की है कि जो भी व्यक्ति अपने मामलों का निस्तारण राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से करवाना चाहते हैं, वे अपना मामला लोक अदालत की तिथि से एक कार्य दिवस पूर्व तक किसी कार्य दिवस में संबंधित न्यायालय से या अपने अधिवक्ता के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। इस प्रकार, राष्ट्रीय लोक अदालत का यह आयोजन जनहित में किया जा रहा है, ताकि लोग अपने विवादों का शीघ्र और प्रभावी निस्तारण कर सकें।

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