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धराली जल प्रलय: आपदा में भी वामपंथी राजनीति, सरकार पर दुष्प्रचार का हमला

कपिल मल्होत्रा
Last updated: August 8, 2025 6:50 am
कपिल मल्होत्रा
6 months ago



देहरादून।
उत्तरकाशी के धराली क्षेत्र में हालिया जल प्रलय के दौरान राज्य सरकार और रेस्क्यू एजेंसियों की त्वरित कार्यवाही के बावजूद एक खास विचारधारा से प्रेरित वामपंथी गुटों द्वारा सरकार की आलोचना करना फिर से चर्चा में आ गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आपदा स्थल पर पहुंचकर स्वयं राहत और बचाव कार्यों की निगरानी की, लेकिन इसके बावजूद कुछ तत्वों ने केवल राजनीति को प्राथमिकता दी।

आपदा के मात्र दस मिनट के भीतर शुरू हुए राहत अभियान को दरकिनार कर इन तथाकथित ‘परिजीवियों’ ने सोशल मीडिया से लेकर अन्य मंचों तक पर राज्य सरकार, जनप्रतिनिधियों और केंद्र की मोदी सरकार को कटघरे में खड़ा करने का क्रम शुरू कर दिया। इनका उद्देश्य आपदा पर राजनीति करना और सरकार के प्रयासों को कमतर दिखाना प्रतीत होता है।

दिल्ली में बैठकर उत्तरकाशी की भौगोलिक परिस्थितियों की अनदेखी करते हुए कुछ लोगों ने झूठे आरोप लगाए कि सड़क निर्माण के लिए हजारों पेड़ काटे गए, जबकि हकीकत यह है कि क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए फोरलेन प्रोजेक्ट और तीन बड़ी जलविद्युत परियोजनाएं रोक दी गई थीं।

इन तत्वों ने कभी जोशीमठ, कभी केदारनाथ, तो कभी ऑल वेदर रोड जैसे विषयों को हथियार बनाकर केंद्र और राज्य सरकार को घेरने का प्रयास किया है। अब धराली की त्रासदी को भी इसी कड़ी में जोड़ने की कोशिश हो रही है। सीमांत क्षेत्रों तक सड़क पहुंचाने का विरोध कर ये लोग “दिल्ली दूर, बीजिंग पास” जैसे नारों के जरिए देशहित के खिलाफ सोच उजागर करते हैं।

रेस्क्यू अभियान में सेना, ITBP और स्थानीय प्रशासन की सक्रियता के बावजूद एक शब्द भी प्रशंसा के नहीं कहे गए। मुख्यमंत्री धामी स्वयं गंगोत्री और हर्षिल क्षेत्र में यात्रियों की सुरक्षित निकासी की निगरानी करते नजर आए। 7 अगस्त को मौसम खुलते ही आठ हेलीकॉप्टर राहत कार्यों में लगाए गए, जिनमें चिनूक जैसे विशेष हेलीकॉप्टर शामिल थे। सैकड़ों यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।

वहीं, कुछ लोग नदी किनारे अतिक्रमण, मलिन बस्तियों और वोटबैंक की राजनीति को नजरअंदाज कर केवल वर्तमान सरकार पर आरोप लगाने में जुटे रहे। यह भी सच है कि नदी किनारे निर्माण पर प्रतिबंध पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकारों ने हटाए थे, जिससे आज ऐसे हालात बने।

भू-कानून पर भी विरोध सिर्फ इसलिए किया गया क्योंकि यह निर्णय इनकी स्वीकृति के बिना लिया गया। वहीं, एक मीडिया समूह द्वारा सीमांत क्षेत्र में आपदा के दौरान ड्रोन उड़ाने जैसी संवेदनशील गतिविधि को भी नजरअंदाज किया गया — जो कि यदि किसी अन्य संस्था द्वारा किया जाता, तो यही लोग हंगामा खड़ा कर देते।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा, “आपदा के समय सभी को एकजुट होकर राहत कार्यों में सहयोग करना चाहिए। राज्य की छवि धूमिल करने वाले तत्वों पर तरस आता है।”

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, “जब भी राज्य पर संकट आता है, ये तत्व सक्रिय हो जाते हैं। उनकी नकारात्मकता के बावजूद सरकार और रेस्क्यू एजेंसियां बेहतरीन कार्य कर रही हैं। हम धैर्य और साहस के साथ हर प्राकृतिक आपदा का सामना कर रहे हैं।”

सरकार की प्रतिबद्धता और जनता की सुरक्षा को लेकर गंभीरता के बीच इस प्रकार की आलोचनात्मक राजनीति न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है बल्कि आपदा में राहत कार्यों के प्रति भी एक अपमानजनक रवैया है।

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