श्री राम सांस्कृतिक एवं सामाजिक सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित महिला रामलीला मंचन अल्मोड़ा मल्ला महल में आईसीएसएसआर, दिल्ली विश्वविद्यालय से एक शोध टीम पहुंची। इस टीम में प्रोफेसर पुनीता गुप्ता, डॉ. चन्द्रशेखर बधानी, निपुन निशांत, अंकिता और विजय सम्मिलित थे। यह शोध उत्तराखण्ड में रामलीलाओं की ऐतिहासिकता, मंचन शैली और महिला सहभागिता के मूल्यांकन पर आधारित है। शोध टीम ने रामलीला के विभिन्न पहलुओं का गहन अध्ययन किया, जिसमें महिलाओं की भूमिका, मंचन की शैली, ऐतिहासिकता और सामाजिक प्रभाव शामिल हैं।
शोध टीम ने रामलीला कलाकारों, दर्शकों और स्थानीय लोगों से बातचीत कर उनकी राय जानी। प्रोफेसर पुनीता गुप्ता ने बताया कि उत्तराखंड में रामलीलाओं की एक समृद्ध परंपरा रही है और इस क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी एक महत्वपूर्ण पहलू है। यह शोध इस परंपरा को समझने और इसके महत्व को उजागर करने में सहायक सिद्ध होगा।
उत्तराखंड के प्रख्यात साहित्यकार त्रिभुवन गिरी महाराज जी के साथ हुक्का क्लब, अल्मोड़ा में किए गए साक्षात्कार में डॉ. चन्द्रशेखर बधानी ने बताया कि महाराज जी द्वारा उपलब्ध कराई गई ‘पुरवासी’ पत्रिका के वर्ष 1980 से 2024 तक के अंकों में प्रकाशित लेखों का अध्ययन इस शोध के लिए महत्वपूर्ण रहा। शोध दल ने शारदीय नवरात्रि के दौरान आयोजित रामलीला मंचन और अल्मोड़ा के विशेष दशहरा महोत्सव से संबंधित तथ्यों को भी एकत्र किया।
शोध टीम ने रामलीला के आयोजन के लिए श्री राम सांस्कृतिक एवं सामाजिक सेवा समिति के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन न केवल पारंपरिक कला एवं संस्कृति को संरक्षित करते हैं, बल्कि महिलाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने और समाज में अपनी भूमिका निभाने का अवसर भी प्रदान करते हैं। महिला रामलीला मंचन के माध्यम से महिलाओं की सृजनशीलता, आत्मनिर्भरता और नेतृत्व क्षमता को बढ़ावा मिलता है।
शोध अध्ययन के दौरान टीम ने यह भी पाया कि इस महिला रामलीला मंचन की ऐतिहासिकता और इसकी मंचन शैली विशेष महत्व रखती है। उत्तराखंड की पारंपरिक रामलीला, जिसमें लोक संस्कृति और स्थानीय संगीत का अद्भुत समावेश होता है, इसे अन्य क्षेत्रों की रामलीलाओं से अलग बनाता है।
टीम ने अपनी अध्ययन रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकाला कि महिला रामलीला न केवल सांस्कृतिक और धार्मिक अभिव्यक्ति का एक मंच है, बल्कि यह महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। इस अध्ययन से प्राप्त निष्कर्ष रामलीला की परंपरा और उसमें महिलाओं की भागीदारी के ऐतिहासिक एवं सामाजिक प्रभाव को गहराई से समझने में सहायक होंगे।
शोध टीम का यह अध्ययन उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत और महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।